नया वर्ष आ गया ; वर्ष 2012 आ गया ; पुराना वर्ष 2011 चला गया। इस समय समाचारों में लोगों का उत्साह दिखाया जा रहा है। घर के कमरे में बैठे-बैठे हमें यहां उरई में खुशी में फोड़े जा रहे पटाखों का शोर सुनाई दे रहा है। लोगों की खुशी को कम नहीं करना चाहते , हमारे कम करने से होगी भी नहीं। कई सवाल बहुत पहले से हमारे मन में नये वर्ष के आने पर , लोगों के अति-उत्साह को देखकर उठते थे कि इतनी खुशी , उल्लास किसलिए ? पटाखों का फोड़ना किसलिए ? रात-रात भर पार्टियों का आयोजन और हजारों-लाखों रुपयों की बर्बादी किसलिए ? कहीं इस कारण से तो नहीं कि इस वर्ष हम आतंकवाद की चपेट में नहीं आये ? कहीं इस कारण तो नहीं कि हम किसी दुर्घटना के शिकार नहीं हुए ? कहीं इस कारण तो नहीं कि हमें पूरे वर्ष सम्पन्नता , सुख मिलता रहा ? इसके बाद भी नववर्ष के आने से यह एहसास हो रहा है कि बुरे दिन वर्ष 2011 के साथ चले गये हैं और नववर्ष अपने साथ बहुत कुछ नया लेकर ही आयेगा। देशवासियों को सुख-समृद्धि-सफलता-सुरक्षा आदि-आदि सब कुछ मिले। संसाधनों की उपलब्धता रहे , आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे। कामना यह भी है कि इस वर्ष में बच्चियां ...
याद है नानी-दादी की कहावतें