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हँसुआ के बिआह में खुरपी के गीत

हँसुआ के बिआह में खुरपी के गीत


इसका मतलब हुआ माहौल के विपरीत अर्थात बिल्कुल अप्रासंगिक बात करना।
यह कहावत बिहार में बहुत प्रचलित है। अगर किसी विषय पर बात चल रही हो और अचानक कोई एक नयी बात शुरू कर दे तो यह कहावत कही जाती है।

सतीश चंद्र सत्यार्थी

Comments

Alpana Verma said…
badiya hai..aisa to aksar kartey hain log..
सुंदर कहावत, और ज्ञानवर्द्धक भी। आभार सतीश जी
बढिया जानकारी।
imnindian said…
badhiya hai ....aisi posting aur dale....
amit said…
Aakhir Kyon हँसुआ के बिआह में खुरपी के गीत
Pauranik KathayenTHANKS FOR ARTICALS