चिट्ठा चर्चा, में स्वर्गीय-श्री प्रह्लाद नारायण मित्तल से मुलाक़ात कीजिए, उड़न तश्तरी ब्लॉग-" आलसी काया पर कुतर्कों की रजाई " डाल कर गज़ब तीर चला दिया मुझको नहीं पता कविता क्या हैं फ़िर भी लिखे जा रहे हैं उधर लोग बाग़ एक परम स्वादिष्ट कविता , परोसे जा रहें हैं साक़ी शराब दे दे .---- कुछ लोग ये गा-गा कर दिन को नशीला बनाने आमादा हैं. बेट्टा, ब्लागिंग छोड़ो ,मौज से रहो , अब भैया का नारा देकर पंडित जी ने गज़ब ढा दिया आँख की किरकिरी -की ताज़ा पोस्ट की "ईश्वर धर्म और आस्था के सहारे मृत्यु का इंतज़ार ही क्या हमारे बुज़ुर्गों के लिए बच गया काम है ?" की इस पंक्ति ने आंख्ने भिगो दीं . शीतल राजपूत के चिट्ठे का स्वागत ज़रूरी है,कुछ दिनों से ब्लॉगन-ब्लागन वार देख के मन खट्टा तो हुआ था किंतु जब ये मारें लातई-लात कहावत देखी तो लगा शायद कोई रास्ता काढ़ लिया जाएगा माँ कविता प्रति इसे मेरा आभार मानिए . तैयार रहिये अपने ब्लॉग पर टिप्पणियों की बरसात के लिए , बांचते ही अपन की बांछें खिल गई अपन भी टिप्पणी पाने की दावेदारी बनाम लालच से भरा ब्लागिया दिल लेकर आज की पोस्ट लिख रहें हैं
याद है नानी-दादी की कहावतें