मन बारां पोवणा घी घालूं कण तेल बारां- बिना पोवणा- बनाना जैसे खाना या कोई पकवान या रोटी बनाना घालूं- डालूं कण का इस्तेमाल या के रूप में हुआ है बिना मन के बनाना है हलवे में घी डालूं या तेल डालूं। इसका अर्थ हुआ कि जो काम करने की इच्छा ही नहीं है उसे कैसे अच्छा करने की कोशिश हो सकती है। उसके लिए तो यही दिमाग में आएगा कि घी डालें या तेल बनना तो खराब ही है। हमारे सामने में ऐसा सवाल कई बार आता है जब हमारे ऊपर काम बेवजह लाद दिया जाता है और हम बिना इच्छा के कर रहे होते हैं। तब यही बात दिमाग में आती है।
याद है नानी-दादी की कहावतें