माई गुन बछरू, पिता गुन घोड़... By Sudhir (सुधीर) March 28, 2009 माई गुन बछरू, पिता गुन घोड़ नाही ज्यादा त थोड़े-थोडअर्थात माँ बाप के गुण अपने बच्चो में आते ही हैं यदि बहुत ज्यादा नहीं तो थोड़े ही.... Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said… सही कहा! यही कहावत हिन्दी में कुछ इस तरह से भी है कि " मां पर धी(बेटी),पिता पर घोडा.. बहुत नहीं तो थोडा-थोडा." Astrologer Sidharth said… बहुत सुंदर डीके शर्माजी ने कहावत को और भी स्पष्ट कर दिया। आभार। संगीता पुरी said… कहावत तो यहां तक है कि ... जैसी मैया वैसी धीया ... पोछ पाछ नतिनियों को दिया .... मतलब कि मां के बाद उसके बच्चों में भी मां के गुण आते हैं। Satish Chandra Satyarthi said… एक कहावत ऐसी भी है "बापे पूत परापत घोडा ना कुछो त थोडम थोडा" Sudhir (सुधीर) said… उपरोक्त कहावत के अतिरिक्त माँ एक और कहावत कहा करती थी (जोकि शर्मा जी की कहावत से मिलती जुलती हैं)जैसन काकर वैसन बिया। जैसन माई वैसन धिया ॥ amit said… Aakhir Kyon ऊंदरे रा जाम्या बिल ही खोदसीPauranik KathayenTHANKS FOR ARTICALS amit said… Aakhir Kyon माई गुन बछरू, पिता गुन घोड़Pauranik KathayenTHANKS FOR ARTICALS
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आभार।
जैसन काकर वैसन बिया। जैसन माई वैसन धिया ॥
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