घर में नईंयाँ दाने,
अम्मा चली भुनाने।
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नईंयाँ - नहीं हैं
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यह कहावत ऐसे लोगों पर सटीक सिद्ध बैठती है जो स्वयं में कुछ न होने के बाद भी अपने आप में बहुत कुछ होने का दम भरते हैं। इसे दूसरे रूप में ऐसे भी देखा जा सकता है कि व्यक्ति कैसे झूठी शान दिखाता घूमता है।
याद है नानी-दादी की कहावतें
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Pauranik Kathayenthank for articals