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ऊधौ का देना ना माधौ का लेना ! तात्पर्य - किसी का कर्ज ना होना ! सम्बन्ध- नौ नगद ना तेरह  उधार !
पाल पाल तोरे जी खां काल ! तात्पर्य - सांप कभी भी आश्रय दाता को मार सकता है इसलिए उसे नहीं पालना चाहिए ! 
काग घोंसला मारिये , मसि भींजत परिहार ! जाट जरुरी मारिये , घुट्नन चलत खंगार ! ! तात्पर्य - काग (कौआ) परिहार, जाट और खंगार ये चार चतुर चालक शत्रु होते हैं अगर इनसे बैर है तो कौए को घोसले में ही , परिहार को मूंछ निकलने से पहले , जाट को जब भी मौका मिले और खंगार को जब वह बच्चा हो तब ही मार देना चाहिए  बर्ना देर हो जाएगी !  
कहे कबीर जमाना छानियाँ , भक्त ना देखे सुनार बानियाँ ! तात्पर्य - सुनार बानियाँ लोग कभी भक्त नहीं होते !

मूंछ उखाड़े मुर्दा हल्को न होवे

मूंछ उखाड़े मुर्दा हल्को न होवे । =============== इस कहावत का अर्थ इस रूप में लगाया जा सकता है कि छोटे-छोटे काम निपटाने से किसी बड़े काम में सफलता नहीं मिलती। बड़े काम को करने में इस तरह के छोटे-छोटे प्रयासों से मदद भी नहीं मिलती। इस तरह के छोटे काम निरर्थक ही कहे जा सकते हैं।

घर में नईंयाँ दाने, अम्मा चली भुनाने

घर में नईंयाँ दाने, अम्मा चली भुनाने। --------------------- नईंयाँ - नहीं हैं --------------------- यह कहावत ऐसे लोगों पर सटीक सिद्ध बैठती है जो स्वयं में कुछ न होने के बाद भी अपने आप में बहुत कुछ होने का दम भरते हैं। इसे दूसरे रूप में ऐसे भी देखा जा सकता है कि व्यक्ति कैसे झूठी शान दिखाता घूमता है।