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माई गुन बछरू, पिता गुन घोड़...

माई गुन बछरू, पिता गुन घोड़ नाही ज्यादा त थोड़े-थोड अर्थात माँ बाप के गुण अपने बच्चो में आते ही हैं यदि बहुत ज्यादा नहीं तो थोड़े ही....

बुड़बक के इयारी आ भादो के उजियारी

बुड़बक के इयारी आ भादो के उजियारी बुडबक = मूर्ख, बेवकूफ; इयारी = दोस्ती, मित्रता; उजियारी = चांदनी मतलब यह की भादों महीने की चांदनी और मूर्ख की मित्रता का कोई भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि ये कभी भी साथ छोड़ सकती हैं। भादों के बरसाती मौसम में कम काले बादल चाँद को ढँक लें और अँधेरा छा जाए, कोई ठिकाना नहीं। इसी प्रकार मूर्ख और धूर्त मित्र भी कब साथ छोड़ जाए इसका कोई भरोसा नहीं। सतीश चंद्र सत्यार्थी

मूरख जिंदगी गुजारता है रोते हुए

ज्ञानी काढ़े ज्ञान सूं  मूरख काढ़े रोय  काढ़े - गुजारता है या निभाता है  कहावत का शाब्दिक अर्थ यह है कि जिस व्‍यक्ति के पास ज्ञान होता है वह अपनी जिंदगी के कड़वे मीठे अनुभवों का आंकलन ज्ञान के साथ करता है वहीं मूर्ख आदमी परिस्थितियों का रोना रोते हुए ही जिंदगी गुजार देता है।  कई बार हताश होता हूं तो मेरी मां मुझे यह कहावत सुना देती हैं। मैं मूरख बनने की बजाय ज्ञानी बनने की चेष्‍टा करने लगता हूं। :) 

एक कहावत

चढ़ते सूरज को सभी सलाम करते है यह कहावत मुझे पिछली पोस्ट को पढ़ कर याद आई । यानि जो व्यक्ति ऊपर की ओर उठ रहा है यानि तरक्की कर रहा है उसे सभी पहचानते है या उनके रिश्तेदार बनने की कोशिश करते है। उसका आदर , सम्मान करते है।

समय धराये तीन नाम, परशु, परसुआ और परशुराम

समय धराये तीन नाम, परशु, परसुआ और परशुराम अर्थात अच्छे बुरे समय के अनुसार, समाज का दृष्टिकोण एक ही व्यक्ति के लिए बदलता रहता हैं। इसके लिए ऋषि परशुराम का उदाहरण का प्रयोग किया गया हैं। जहाँ बचपन में प्रेम में बालक को परशु नाम से जाना जाता हैं वहीं वक्त बदलने के साथ दारिद्र के कारण उन्हें परसुआ नाम से बुलाया गया। कालांतर में जब उन्होंने विश्व विजय का अभियान शुरू किया तो लोग उन्हें आदर से परशुराम के नाम से बुलाने लगे।

एक कहावत बिहार की

होम करते हाथ जले होम का उद्दयेश लाभ से है। अगर होम करते वक्त किसी व्यक्ति का हाथ जल जाए तो पुण्य लाभ की जगह उसे परेशानी या मुसीबत का सामना करना पड़ जाता है। यानि भलाई का काम करने पर परिणाम अगर बुरा मिले तो इस कहावत का इस्तेमाल किया जाता है।

चोरन गारीं दें

चीज न राखैं आपनी, चोरन गारी दैं। -------------- भावार्थ - इसका अर्थ सीधा सा है कि कुछ लोग हैं जो अपने सामान की रक्षा तो करते नहीं हैं बाद में चोरी हो जाने पर चोरों को गाली देते फिरते हैं। कहने का तात्पर्य है कि हमेशा स्वयं ही अपने सामान या फिर अपने अधिकारों के लिए सचेत रहना चाहिए।